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Saturday, December 25, 2010

मानवीय विवशतायें !



विवशतायें!
मौन और संवाद की,

विवशतायें,
हर्ष और अवसाद की,

विवशताये,
विवेक और प्रमाद की,

विवशतायें,
रुदन और आल्हाद की,


विवशतायें,
बेरुखी और अहसास की,

विवशतायें
म‍क्‍तूल और जल्लाद की,

विवशतायें
हिरण्कष्यप और प्रह्ललाद की,


हाय रे मानव मन,
और उसकी विवशतायें!